कबीरधामपंडरिया

शर्मनाक! पंडरिया में शासकीय डॉक्टर को पड़ा थप्पड़, फेडरेशन मौन—प्रभारी CMHO बने आरोपी की ढाल

कवर्धा। पंडरिया के शासकीय अस्पताल में एक शासकीय चिकित्सक के साथ मरीज पक्ष द्वारा मारपीट का मामला सामने आया है। घटना के बाद डॉक्टरों में भारी आक्रोश है, लेकिन जिला चिकित्सा अधिकारी (प्रभारी CMHO) की चुप्पी और कार्रवाई के बजाय नोटिस जारी करने से पूरे स्वास्थ्य अमले में निराशा फैल गई है।

 

डॉक्टर बोले—अब अस्पताल में ड्यूटी करना असुरक्षित

 

पीड़ित चिकित्सक का कहना है कि अस्पताल में हिंसा की यह पहली घटना नहीं है, लेकिन इस बार प्रशासन का रवैया डॉक्टर विरोधी नजर आ रहा है।“हमारे साथ हुई मारपीट के बाद भी प्रभारी CMHO सर ने इंस्टीट्यूशनल FIR तक नहीं करवाया। उल्टा डॉक्टरों को नोटिस देकर धमकाया जा रहा है,” — पीड़ित डॉक्टर ने कहा।

 

अन्य ड्यूटी डॉक्टरों का कहना है कि अब ड्यूटी करने में भय लगने लगा है, क्योंकि न तो सुरक्षा व्यवस्था है और न ही वरिष्ठ अधिकारियों का साथ।

 

CMHO पर गंभीर आरोप—शासन आदेश की उड़ाई धज्जियां

 

स्वास्थ्य अमले ने प्रभारी CMHO कवर्धा पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सीएमएचओ साहब जिले में सलंग्निकरण (अस्थायी पदस्थापना) के नाम पर अवैध वसूली और मनमानी कर रहे हैं।

 

स्थानांतरण के बाद भी कई चिकित्सा अधिकारियों को कार्यमुक्त नहीं किया जा रहा है। पंडरिया के चिकित्सा अधिकारी को भी नियमों के विरुद्ध जिला अस्पताल में अवैध रूप से संलग्न रखा गया है।

 

“क्या पंडरिया में डॉक्टरों की जरूरत नहीं है? क्या शासन का आदेश प्रभारी CMHO पर लागू नहीं होता?” — स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी ने कहा।

 

फेडरेशन की चुप्पी पर सवाल

 

डॉक्टरों ने कहा कि फेडरेशन से उम्मीद थी कि वह डॉक्टरों की सुरक्षा और सम्मान की लड़ाई में सामने आएगा, लेकिन संगठन की चुप्पी ने निराश किया है।“जब डॉक्टर पर हमला होता है तो संगठन और अधिकारी दोनों मौन क्यों हो जाते हैं?” — डॉक्टरों ने सवाल उठाया।

 

अस्पताल में हिंसा की असली वजह

 

स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों में लगातार बढ़ रही हिंसा की असली वजह प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण है। आरोपी नेताओं पर कार्रवाई नहीं होना और अधिकारी का झुकाव राजनीतिक दबाव में होना, दोनों ही कारणों से हालात बिगड़ रहे हैं।

 

डॉक्टरों की चेतावनी—अब होगा आंदोलन

 

डॉक्टरों ने कहा कि वेतन कटौती और नोटिस देने से पहले CMHO को यह बताना चाहिए कि अस्पताल में हिंसा रोकने के लिए उन्होंने क्या कदम उठाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होती और CMHO डॉक्टर विरोधी रवैया जारी रखते हैं, तो पूरे जिले में चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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