वर्षा के मौसम में मच्छरजनित बीमारियों से बचाव के लिए जनजागरूकता आवश्यक

कवर्धा, 31 अक्टूबर 2025। वर्षा के दौरान वातावरण में अधिक नमी, जलभराव और गर्मी के कारण मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। मच्छर कई संक्रामक बीमारियों के वाहक होते हैं, जो मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डालते हैं। इनमें मुख्यतः मलेरिया, डेंगू, चिकुनगुनिया, फाइलेरिया और जापानी एंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियाँ शामिल हैं, जो कभी-कभी जानलेवा भी साबित होती हैं। इन रोगों से बचाव के लिए जनसामान्य में इनके लक्षण, कारण, इलाज और रोकथाम के प्रति जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
मलेरिया एक परजीवी जनित रोग है जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और कमजोरी प्रमुख हैं। रोकथाम के लिए घर एवं आसपास पानी जमा न होने दें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें, लार्वा दिखाई देने पर टेमीफॉस या जला हुआ तेल डालें, और लक्षण दिखने पर तुरंत खून की जांच कर उपचार लें। डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है, जो दिन में काटता है और साफ पानी में पनपता है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में तीव्र दर्द, चकत्ते और प्लेटलेट्स की कमी शामिल हैं। रोकथाम के लिए टंकी, कूलर, गमले आदि को सप्ताह में एक बार साफ करें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें और मच्छररोधी उपाय अपनाएं।
चिकुनगुनिया भी एडीज मच्छर से फैलता है और इसमें तेज बुखार के साथ गंभीर जोड़ों का दर्द मुख्य लक्षण है। डेंगू जैसे ही इसके रोकथाम के उपाय हैं। उचित आराम, तरल पदार्थ और दर्द निवारक दवाओं से लक्षणात्मक उपचार किया जाता है। फाइलेरिया रोग संक्रमित क्यूलेक्स मच्छर से फैलता है, जो गंदे पानी में पनपते हैं। लंबे समय बाद हाथ, पैर या जननांगों में सूजन (हाथीपांव) इसके लक्षण हैं। इससे बचाव के लिए जल जमाव रोकें, नालियों की सफाई करें और सरकार द्वारा दी जाने वाली वार्षिक फाइलेरिया दवा का सेवन करें। स्वास्थ्य संस्थानों में इस रोग की जांच व उपचार निःशुल्क उपलब्ध हैं तथा हाइड्रोसिल का ऑपरेशन भी निःशुल्क किया जाता है।
जापानी एंसेफेलाइटिस एक वायरल बीमारी है जो सूअर पालन क्षेत्रों में पाए जाने वाले संक्रमित मच्छरों से फैलती है। यह रोग विशेषकर बच्चों में होता है। तेज बुखार, उल्टी, सिरदर्द, बेहोशी और झटके इसके लक्षण हैं। इससे बचाव के लिए टीकाकरण, मच्छर नियंत्रण और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। मच्छरों से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए प्रत्येक रविवार को “ड्राई डे” मनाया जाए, घर एवं आसपास रुके पानी को हटाया जाए, मच्छरदानी का प्रयोग किया जाए और फुल आस्तीन के कपड़े पहने जाएं। प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और मच्छर पनपने न दें। शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को नियमित रूप से मच्छरजनित बीमारियों की जानकारी दी जाए तथा जनजागरूकता रैली का आयोजन किया जाए। यातायात वाहनों, प्रेस विज्ञप्तियों और सोशल मीडिया के माध्यम से निरंतर प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को जागरूक किया जा सकता है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम अंतर्गत मलेरिया, डेंगू और फाइलेरिया की जांच, परीक्षण एवं उपचार सभी शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में निःशुल्क उपलब्ध हैं।